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सकारात्मक रहे.. सकारात्मक जिए

*ये कहानी आपके जीने की सोच बदल देगी!* एक दिन एक किसान का बैल कुएँ में गिर गया। वह बैल घंटों ज़ोर -ज़ोर से रोता रहा और किसान सुनता रहा और विचार करता रहा कि उसे क्या करना चाहिऐ और क्या नहीं। अंततः उसने निर्णय लिया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चूका था अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं था और इसलिए उसे कुएँ में ही दफना देना चाहिऐ।। किसान ने अपने सभी पड़ोसियों को मदद के लिए बुलाया सभी ने एक-एक फावड़ा पकड़ा और कुएँ में मिट्टी डालनी शुरू कर दी। जैसे ही बैल कि समझ में आया कि यह क्या हो रहा है वह और ज़ोर-ज़ोर से चीख़ चीख़ कर रोने लगा और फिर ,अचानक वह आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। सब लोग चुपचाप कुएँ में मिट्टी डालते रहे तभी किसान ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गया.. अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर एक कदम बढ़ाकर उस पर चढ़ जाता था। जैसे-जैसे किसान तथा उसके पड़ोसी उस पर फावड़ों से मिट्टी गिराते वैसे -वैसे वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को गिरा देता और एक सीढी ऊपर चढ़ आता जल्दी...

Kahani

*एक राजमहल में कामवाली और उसका बेटा काम करते थे!* *एक दिन राजमहल में कामवाली के बेटे को हीरा मिलता है।* *वो माँ को बताता है….* *कामवाली होशियारी से वो हीरा बाहर फेककर कहती है ये कांच है हीरा नहीं…..* *कामवाली घर जाते वक्त चुपके से वो हीरा उठाके ले जाती है।* *वह सुनार के पास जाती है…* *सुनार समझ जाता है इसको कही मिला होगा,* *ये असली या नकली पता नही इसलिए पुछने आ गई.* *सुनार भी होशियारीसें वो हीरा बाहर फेंक कर कहता है! ये कांच है हीरा नहीं।* *कामवाली लौट जाती है। सुनार वो हीरा चुपके सेे उठाकर जौंहरी के पास ले जाता है,* *जौंहरी हीरा पहचान लेता है।* *अनमोल हीरा देखकर उसकी नियत बदल जाती है।* *वो भी हीरा बाहर फेंक कर* *कहता है ये कांच है हीरा नहीं।* *जैसे ही जौहरी हीरा बाहर फेंकता है…* *उसके टुकडे टुकडे हो जाते है…* *यह सब एक राहगीर निहार रहा था…* *वह हीरे के पास जाकर पूछता है…* *कामवाली और सुनार ने दो बार तुम्हे फेंका…* *तब तो तूम नही टूटे…* *फिर अब कैसे टूटे?* *हीरा बोला….* *कामवाली और सुनार ने दो बार मुझे फेंका* *क्योंकि…* *वो मेरी असलियत से अनजान थे।* ...

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🙏🏼एक आदमी ने बहोत ही सुंदर लड़की से ब्याह किया। वो उसे बहोत प्यार करता था। अचानक उस लड़की को चर्मरोग हो गया कारण वश उसकी सुंदरता कुरूपता में परिवर्तित होने लगी। अचानक एक दिन सफर में दुर्घटना से उस व्यक्ति के आँखों की रौशनी चली गई। दोनों पति-पत्नी की जिंदगी तकलीफों के बावजूद भी एक दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक चल रही थी। दिन ब दिन पत्नी अपनी सुंदरता खो रही थी पर पति के देख न पाने के कारण उनके प्यार में कोई कमी नही आ रही थी । दोनों का दाम्पत्य जीवन बड़े प्यार से चल रहा था। रोग के बढ़ते रहने के कारण पत्नी की मृत्यु हो गई। पति को बहोत दुःख हुआ और उसने उसकी यादों के साथ जुड़ा होने के कारण उस शहर को छोड़  देने का विचार किया। उसके एक मित्र ने कहा अब तुम पत्नी के बिना सहारे अंजान जगह अकेले कैसे चल फिर पाओगे ? उसने कहा मैं अँधा होने का नाटक कर रहा था,क्यों की अगर मेरी पत्नी को ये पता चल जाता की मैं देख सकता हूँ तो उसे अपने रोग से ज्यादा कुरूपता पर  दुःख होता और में उसे इतना प्यार करता था,की किसी भी हालत में उसे दुखी नही देख सकता था। वो एक बहोत ही अच्छि पत्नी थी और मैं उसे हमेशा खुश द...

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*बहुत सुंदर कथा ..* *एक औरत अपने परिवार के सदस्यों के लिए रोज़ाना भोजन पकाती थी और एक रोटी वह वहाँ से गुजरने वाले किसी भी भूखे के लिए पकाती थी..।* *वह उस रोटी को खिड़की के सहारे रख दिया करती थी, जिसे कोई भी ले सकता था..।* *एक कुबड़ा व्यक्ति रोज़ उस रोटी को ले जाता और बजाय धन्यवाद देने के अपने रस्ते पर चलता हुआ वह कुछ इस तरह बड़बड़ाता- "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा..।"* *दिन गुजरते गए और ये सिलसिला चलता रहा..* *वो कुबड़ा रोज रोटी लेके जाता रहा और इन्ही शब्दों को बड़बड़ाता - "जो तुम बुरा करोगे वह तुम्हारे साथ रहेगा और जो तुम अच्छा करोगे वह तुम तक लौट के आएगा.।"* *वह औरत उसकी इस हरकत से तंग आ गयी और मन ही मन खुद से कहने लगी की-"कितना अजीब व्यक्ति है,एक शब्द धन्यवाद का तो देता नहीं है, और न जाने क्या-क्या बड़बड़ाता रहता है, मतलब क्या है इसका.।"* *एक दिन क्रोधित होकर उसने एक निर्णय लिया और बोली-"मैं इस कुबड़े से निजात पाकर रहूंगी।"* *और उसने क्या किया कि उसने उस रोटी में ज़हर मिला दि...